- मध्य प्रदेश में चार साल में 1,054 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी, इंदौर में 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान के जरिए लोगों को सिखाए जा रहे डिजिटल सुरक्षा के गुर
- PPFAS Mutual Fund Opens New Office in Indore
- पीपीएफएएस म्यूचुअल फंड ने इंदौर में नया ऑफिस खोला
- Arjun Kapoor Birthday Special - From Vienna to London, A Look at His Most Memorable Travel Diaries
- Saree' teaser has all the makings of the next chartbuster; fans await Riteish Deshmukh's full visual on June 27
चार दिन के अंतराल में तीन बड़े ग्रह हो रहे वक्री, जानिए क्या होगा असर
डॉ श्रद्धा सोनी, वैदिक ज्योतिषाचार्य, रतन विशेषज्ञ

अगले माह 6 ग्रह, (जिस में राहु-केतु समाविष्ट है) चलेंगे वक्री चाल। यहां विश्लेषण करेंगे कि अपने देश पर क्या असर पड़ेगी।
पूरी दुनिया इन दिनों एक गंभीर संकट कोरोना का सामना कर रही है, ऐसे में एक बार फिर ग्रहों की चाल ने ज्योतिष के जानकारों को परेशानी में डाल दिया है।
ऐसे में इस वर्ष 2020 के मई जून में ग्रहों का अजब संयोग बनने जा रहा है जब राहु केतु के अलाव चार और ग्रह वक्री चाल से चलेंगें। वहीं इस बीच काल सर्प योग भी प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की ऐसी स्थिति शुभ नहीं होती है। पूरी दुनिया इन दिनों एक गंभीर संकट का सामना कर रही है ऐसे में 6 ग्रहों का एक साथ उलटी चाल कई मामलों में गंभीर होती दिख रही है।
वक्री ग्रह अक्सर अप्रत्याशित रूप से अच्छे और बुरे दोनों परिणाम देते हैं। प्रतिगामी गति में ग्रह पृथ्वी के अधिक निकट होते हैं। इसलिए उनका प्रभाव अधिक महसूस होता है। वहीं वक्री गति में ग्रहों के कारक तत्वों की कमी हो जाती है।
ऐसी स्थिति में कुंडली के जिस घर में वक्री ग्रह होते हैं उनके परिणाम समुचित नहीं दे पाते हैं। इसलिए माना जाता है कि जब ग्रह वक्री गति में हों तब किसी नई नीति या परियोजना को शुरू नहीं करना चाहिए।
कौन सा ग्रह कब हो रहा है वक्री?
11 मई 2020 को शनि अपनी राशि मकर में वक्री हो जाएंगे, जो सितंबर 29, 2020 तक इसी स्थिति में रहेंगे। इसके बाद 13 मई को शुक्र वक्री हो जाएंगे, जो जून 25, 2020, गुरुवार तक इसी अवस्था में रहेंगे।
और फिर 14 मई को बृहस्पति भी वक्री हो रहे हैं, जो सितंबर 13, 2020, रविवार तक वक्री रहेंगे। इसके अलावा, 18 जून को बुध उलटी चाल से चलने लगेंगे, जो जुलाई 12, 2020, रविवार तक इसी स्थिति में रहेंगे।
ऐसे में 18 जून 2020 से 25 जून 2020 के बीच ये चारों ग्रह एक ही समय पर वक्री चाल चलेंगे। वहीं राहु केतु को भी जोड़ लिए जाने पर वक्री गति चलने वाले ग्रहों की संख्या 6 हो जाएगी। ग्रहों की यह स्थिति 15 जुलाई तक कालपुरुष कुंडली में बने काल सर्प दोष के साथ परस्पर व्याप्त होती है जिसका परिणाम चिंताजनक हो सकता है।
ग्रहों की इस वक्री चाल के समय 18 जून से 25 जून के बीच चार ग्रह – शनि, बृहस्पति, शुक्र और बुध – एक ही समय में वक्री गति में होंगे।
भारत की कुंडली के अनुसार जहां एक ओर ग्रहों की वक्री चाल कुछ मामलों में लाभ दे सकती है वहीं यह चाल देश में भ्रम और अराजकता का कारण भी बन सकती है। वहीं देवताओं के सेनापति मंगल के अलावा सूर्य व चंद्र मार्गी होने के चलते इस दौरान अपना काफी प्रभाव छोड़ सकते हैं। ये कई चीजों से सख्ती से निपटेंगे, जिसके चलते रक्त से जुड़े कुछ मामले समाने आ सकते हैं।
वक्री शनि का असर
ज्योतिष के अनुसार वक्री शनि उन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए शक्ति देते हैं, जिन्हें अतीत में अधूरा छोड़ दिया गया था। ऐसे में शनि भारत की कुंडली में नौवें और दसवें भाव के स्वामी हैं, अर्थात योगकारक ग्रह हैं। शनि 11 मई से 29 सितंबर तक मकर राशि में वक्री रहेंगे, जो भारत की कुंडली के नौवें भाव में है।
शनि की वक्री गति जिम्मेदारियों और काम के बोझ के साथ एक कठिन अवधि को दर्शाता है। लेकिन यह लोगों को अपने कौशल को अधिक निखारने और यथार्थवादी व व्यवहारिक बनने में भी मदद करेगा। कोरोनावायरस के कारण आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए नई नीतियां बनाई जा सकती हैं। न्यायिक सुधार और न्यायिक ढांचे का पुनर्गठन भी हो सकता है।
शुक्र की वक्री गति का प्रभाव
ज्योतिष में शुक्र जहां भाग्य का कारक ग्रह माना जाता है, वहीं इसे विलासिता, आराम, सौंदर्य और खुशी की भावना का ग्रह भी माना जाता है। ऐसे में यदि भारत की कुंडली देखें तो यहां शुक्र पहले और छठे भाव के स्वामी हैं। शुक्र 13 मई से 25 जून तक वृष राशि में वक्री रहेंगे जो भारत की कुंडली के पहले भाव में स्थित हैं।
इस कारण ऐसा माना जा रहा है कि इस अवधि के दौरान लोगों के सामान्य दृष्टिकोण में सुधार होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की समीक्षा की जाएगी। यात्रा और आतिथ्य उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए समर्थन और प्रोत्साहन मिल सकता है। साथ ही भारत की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।
देवगुरु बृहस्पति की वक्री चाल का असर
देवताओं के गुरु बृहस्पति को ज्ञान और विद्या का ग्रह माना जाता हैं। ज्योतिष के अनुसार वक्री गति में गुरु के शुभ परिणाम देने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। यदि भारत देश की कुंडली के संबंध में बात की जाए तो बृहस्पति भारत की कुंडली में आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी है और 14 मई से 13 सितंबर तक मकर राशि में वक्री रहेंगे जो भारत की कुंडली के नौवें घर में स्थित हैं।
इस दौरान देश में उन कार्यों और परियोजनाओं को फिर से शुरू करने की क्षमता बढ़ेगी, जिन्हें पहले अधूरा छोड़ दिया गया था। यह वह समय है जब बीमार कंपनियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है और सरकार द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज भी प्रदान किया जा सकता है। वहीं भारत के अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों को मजबूती मिल सकती है। इस समय जन आक्रोश और अशांति की भी आशंका रहेगी।
वक्री बुध के परिणाम
ज्योतिष में बुध को बुद्धि का कारक ग्रह माना गया है। वहीं बुध व्यापार, संचार व्यवस्था एवं नयी सोच का प्रतीक है। भारत की कुंडली की बात करें तो इसमें बुध दूसरे और पांचवें भाव के मालिक हैं, जबकि यह लग्न में स्थित हैं। यह 18 जून से 12 जुलाई के बीच वृषभ राशि में वक्री रहेंगे।
ऐसे में इस समय के दौरान कोरोनो वायरस के प्रभावों से निपटने के लिए नए विचार और समाधान सामने आ सकते हैं। पड़ोसियों देशों के साथ संवाद में व्यवधान आ सकता है।।।


